सुजाक रोग
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| सुजाक रोग |
सुजाक रोग एक संक्रामक यौन रोग (यौन संचारित बीमारी (एसटीडी)) है। सुजाक रोग नीसेरिया गानोरिआ नामक जीवाणु से होता है जो महिला तथा पुरुषों में प्रजनन मार्ग के गर्म तथा गीले क्षेत्र में आसानी और बड़ी तेजी से बढ़ती है। इसके जीवाणु मुंह, गला, आंख तथा गुदा में भी बढ़ते हैं। उपदंश की तरह यह भी एक संक्रामक रोग है अतः उन्ही स्त्री-पुरुषों को होता है जो इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति से यौन संपर्क करते हैं।
सुजाक रोग में चूँकि लिंगेन्द्रिय के अंदर घाव हो जाता है और इससे पस निकलता है अतः इसे हिंदी में 'पूयमेह ' , औपसर्गिक पूयमेह और ' परमा ' कहते हैं और अंग्रेजी भाषा में गोनोरिया (gonorrhoea ) कहते हैं। पश्चिमी देशों में इसे क्लेप (clap ) के नाम से भी जाना जाता है।
यह रोग स्त्री पुरुष दोनों को हो जाते है। अतः सुजाक रोग से ग्रस्त स्त्री-पुरुष को सहवास नहीं करना चाहिए।
सुजाक रोग के लक्षण
किसी भी यौन सक्रिय व्यक्ति में सुजाक की बीमारी हो सकती है। जबकि कई पुरुषों में सुजाक के कोई लक्षण दिखाई नहीं पड़ते तथा कुछ पुरुषों में संक्रमण के बाद दो से पांच दिनों के भीतर कुछ संकेत या लक्षण दिखाई पड़ते हैं।
कभी कभी लक्षण दिखाई देने में 30 दिन भी लग जाते हैं। इनके लक्षण हैं- पेशाब करते समय जलन, लिंग से सफेद, पीला या हरा स्राव। कभी-कभी सुजाक रोग वाले व्यक्ति को अंडग्रंथि में दर्द होता है या वह सूज जाता है।
महिलाओं में सुजाक रोग के लक्षण काफी कम होते हैं। आरंभ में महिला को पेशाब करते समय दर्द या जलन होती है, योनि से अधिक मात्रा में स्राव निकलता है या मासिक धर्म के बीच योनि से खून निकलता है।
सुजाक रोग का उपचार
1. फिटकरी का चूर्ण २ मासे नित्य पानी से खाने से सुजाक रोग में आराम मिलता है।
2. गाये के गर्म दूध में पुराना गुड़ डालकर पीने से भयंकर सुजाक रोग भी ठीक हो जाता है।
3. गरी का फूल ,केले का फूल ५०-५० ग्राम ,गिलेरमानी रूमी मस्तंगी १०-१० ग्राम बंसलोचन ५ ग्राम सबको पीसकर चूर्ण बना ले १०० मि.ग्रा. दिन में ताजे पानी से लें। सुजाक रोग तथा गर्मी के रोगियों के लिए रामबाण इलाज है।

